जेल से फरार होने के फिराक में है झारखण्ड का डॉन अखिलेश सिंह

अपराधी डॉन अखिलेश सिंह एक बार फिर से जेल से फरार होने के फिराक में है। बिहार का निवासी झारखंड के इस खतरनाक गैंगस्टर द्वारा जेलर उमाशंकर पांडेय की जेल परिसर में हत्या के आरोप में निचली अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई है | रांची हाइकोर्ट ने भी बहाल रखा और उसपर किसी तरह का रहम नहीं बरतने का आदेश सुनाया है |

अखिलेश 50 से अधिक मामलों में वांटेड है इसके खिलाफ 36 मामले दर्ज हैं। अखिलेश सिंह के आतंक का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अपने खिलाफ उठने वाली हर आवाज को उसने खामोश कर दिया। आज तक जिसने भी अखिलेश के खिलाफ आवाज उठाई, उस पर गोली चलाई गई या फिर उसकी हत्या कर दी गई। अखिलेश ने पुलिस अधिकारी, जज, जेलर, व्यवसायी, यहां तक कि दूसरे गुट के अपराधियों को भी नहीं बख्शा है। |

जेलर की हत्या कर डाली बिजनेसमैन ओम प्रकाश काबरा के अपहरण काण्ड में अखिलेश सिंह पहली बार जमशेदपुर के घाघीडीह जेल गया था। 12 फरवरी 2002 को उसने जेलर उमाशंकर पांडेय की जेल के अंदर ही हत्या कर दी थी। जेलर ने अखिलेश को जेल में बांध कर पीटा था और कई दिनों तक बेड़ियों से भी बांध रखा गया था। कुछ दिन तक खामोश रहने का बाद अखिलेश जेल से फरार हो गया और 15 दिन बाद दोबारा जेल कैंपस में स्थित जेलर के घर पंहुचकर जेलर उमाशंकर की गोली मार कर हत्या कर दी है |

उमाशंकर पांडेय मर्डर केस में जज आर पी रवि ने अखिलेश को उम्रकैद की सुनाई थी। सजा सुनने के बाद अखिलेश ने 19 मार्च 2008 को जज के घर में घुस कर उनपर ताबड़तोड़ फायरिंग की थी। हालांकि, इस हमले में जज आर पी रवि बाल-बाल बच गए थे, लेकिन इस घटना के बाद जमशेदपुर में अखिलेश को आतंक का दूसरा पर्याय माने जाने लगा।

 

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